नया साल

1 week ago
आज का विषय साधारण नहीं, विचार करने योग्य है। हर वर्ष 1 जनवरी को ईसाई नववर्ष मनाया जाता है, लेकिन हिन्दू पंचांग के अनुसार यह समय प्रायः खरमास में होता है, जिसे शुभ कार्यों के लिए निषिद्ध माना गया है। तो प्रश्न यह उठता है— क्या ऐसे समय में नववर्ष की खुशियाँ मनाना अशुभ है? ? खरमास का वास्तविक शास्त्रीय अर्थ शास्त्र कहते हैं— खरमास में विवाह गृहप्रवेश मुंडन जैसे संस्कारात्मक कर्म वर्जित हैं। लेकिन ध्यान दीजिए— ? जन्म, मृत्यु, जप, तप, दान और आत्मचिंतन पर कोई निषेध नहीं है। अर्थात— कर्मकांड रुके हैं, जीवन नहीं। ? नवजात शिशु का उदाहरण अब एक सरल प्रश्न सोचिए यदि खरमास में शुभ कार्य नहीं होते, तो क्या उस समय जन्मा शिशु अशुभ होता है? उत्तर है— कदापि नहीं। शिशु का जन्म ईश्वर की इच्छा से होता है वह पूर्णतः शुभ और पवित्र होता है केवल उसके संस्कार उचित मुहूर्त में किए जाते हैं ? यही सिद्धांत नववर्ष पर भी लागू होता है। ? नववर्ष : उत्सव या चेतना? यदि 1 जनवरी को हम— आत्मचिंतन करें बीते वर्ष की गलतियों से सीख लें नए संकल्प लें तो यह शुभता के विरुद्ध नहीं, बल्कि सात्त्विक आचरण है। दोष तब है जब— अत्यधिक भोग मद्यपान असंयम को ही नववर्ष मान लिया जाए। संतुलित हिन्दू दृष्टि हिन्दू धर्म निषेधवादी नहीं, संतुलनवादी है। > खरमास में संस्कार टल सकते हैं, लेकिन संकल्प नहीं। नया वर्ष यदि अहंकार नहीं सुधार का भाव कृतज्ञता और संयम लेकर आए— तो वह अशुभ नहीं हो सकता। निष्कर्ष (Conclusion) जैसे खरमास में जन्मा शिशु शुभ होता है, वैसे ही उस काल में आया नया वर्ष भी आशा और चेतना का संकेत हो सकता है।

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Mera naam rachna hai mai pichle 3 saal se jyotish Jyotish ke Kshetra Mein Karya kar rahi ho...

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