मंगल दोष पूजा
Mangal Dosh Puja
मंगल दोष पूजा वैदिक ज्योतिष के अनुसार एक विशेष अनुष्ठान है, जो जन्म कुंडली में उपस्थित मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों को शांत करने के लिए किया जाता है। जिन व्यक्तियों की कुंडली में मंगल दोष होता है, उन्हें विवाह में विलंब, वैवाहिक जीवन में तनाव, स्वास्थ्य समस्याएँ, या आर्थिक अड़चनें अनुभव हो सकती हैं।
पूजा का महत्व
मंगल दोष पूजा करने से मंगल ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और जीवन में स्थिरता, सौभाग्य, व वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। यह पूजा व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह को शुभ परिणाम देने वाला बनाती है।
पूजा से मिलने वाले लाभ
विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं।
पति-पत्नी के बीच आपसी समझ व प्रेम बढ़ता है।
आत्मविश्वास, ऊर्जा और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।
भूमि, संपत्ति और वाहन संबंधित लाभ प्राप्त होते हैं।
क्रोध, अहंकार और आवेग पर नियंत्रण मिलता है।
पूजा की विधि
मंगल दोष पूजा प्रायः मंगलवार के दिन की जाती है। इसमें पंडितजी द्वारा मंगल ग्रह शांति पाठ, हवन, मंत्र जाप (10,000 बार “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”) और मंगल कवच का पाठ किया जाता है। पूजा से पहले भक्त को स्नान कर लाल वस्त्र धारण करना और श्री गणेश की आराधना करना आवश्यक होता है।
आवश्यक सामग्री
लाल पुष्प, लाल वस्त्र, मसूर की दाल, गुड़, तांबे का पात्र, लाल चंदन, नारियल, और भगवान हनुमान की मूर्ति/चित्र।
विशेष अनुशंसा
जिनकी कुंडली में लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल स्थित हो, उन्हें यह पूजा अवश्य करानी चाहिए।