वसंत पंचमी / सरस्वती पूजा

नमस्ते शारदे देवी सरस्वती मतिप्रदे। वसत्वं मम जिह्वाग्रे सर्व विद्या प्रदा भव।। मंत्र का अर्थ है, "हे शारदा देवी (सरस्वती), हे ज्ञान प्रदान करने वाली, आप मेरी जिह्वा (जीभ) के अग्र भाग पर निवास करें और मुझे सभी विद्याएँ (ज्ञान) प्रदान करें" यह मंत्र क्यों जपा जाता है... विद्यार्थियों द्वारा अध्ययन में एकाग्रता और स्मरण-शक्ति के लिए, लेखकों, वक्ताओं, शिक्षकों द्वारा वाणी की स्पष्टता के लिए, कलाकारों द्वारा रचनात्मकता और सौंदर्यबोध के लिए, ज्ञान साधकों द्वारा विवेक और प्रज्ञा के विकास के लिए जपा जाता है। यह मंत्र सिर्फ पढ़ाई का नहीं है, यह प्रार्थना है कि... ज्ञान में अहंकार न आए, बुद्धि में विनम्रता हो, वाणी में मधुरता हो, विद्या का उपयोग अच्छे कार्यों में हो। रोज 108 बार जाप करे।